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सड़कें पर घुमती मौत : ट्रांसपोर्ट विभाग और ट्रैफ़िक विभाग ने बंद की आँखें,

फरीदकोट(शरणजीत ) इन दिनो फरीदकोट शहर में सड़को पर शरेआम मौत रूपी ओवरलोड ट्रैक्टर ट्राले घूम रहे हैं और सम्बन्धित विभाग आँखे बंद कर गहरी नींद सोया किसे बड़े हादसो का इन्तज़ार कर रहा है।ज़िक्र योग्य है कि बीते कुछ महीनों से बड़ी संख्या ट्रैक्टर ट्रालियों की कमर्शियल प्रयोग ज़रूरत से ज़्यादा अधिक हो गई है और शहर अंदर बड़ी मात्रा में ट्रैक्टरों पीछे डाले बड़े बड़े ट्रालियों में निर्धारित मात्रा से करीब चार गुणों अधिक लोड भर कर जहाँ शहर में सड़कें को तोड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं वहां ही कई बड़े हादसों का कारण भी बन रहे हैं। कईवार तो इन ट्रैक्टर ट्रालियों में भार इतना ज़्यादा होता है कि ट्रैक्टर के अगले टायर रोड पर ही नहीं लगते और कटाई पिछले टायरों के ब्रेकों के हिसाब के साथ ही होती है,जिस कारण किसी भी समय कोई भी बड़ा हादसा घट सकता है।
क्या ढोते हैं यह ट्रैक्टर ट्राले? जब से इलाको में रेत माफिया सक्रिय हुआ है तब से यह ट्रैक्टर ट्राले सड़कें पर आए हैं, हन ट्रैक्टर ट्रालियाँ के द्वारा जायज नाजइज रेत के कारोबार को अन अनजाम दिया जा रहा है और रेत के उवरलोड भरे यह ट्रैक्टर ट्राले बेखौफ सिर्फ़ दो टायरों और रोड पर चलते हैं और यही नहीं ज़िला कचेहरी कंपलैक्स और मापनी सचिवालय के बिल्कुल सामने उवरलोड ट्रैक्टर ट्राले आम गुज़रते हैं, परन्तु न तो ट्रैफ़िक विभाग और न ही ज़िला ट्रांसपोर्ट विभाग इन को रोकनो की हिमाकत करता है।भरोसेयोग सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार इस कारोबार में सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के इलावा कई पूर्व और मौजूदा पुलिस वाले भी शामिल हैं।सब से बड़ी बात यह देखने में आई है कि सड़को का और मौत रूपी बेखौफ चलते इन ट्रैक्टर ट्रालियाँ और ज्यादा तर नंबर भी नहीं लिखा होता और कोई हादसा घटने के बाद यह लोग हादसो वाली जगह से ट्रैक्टर ले कर भाग जाते हैं और ट्राले पर कोई नंबर वग़ैरा नाम होने के कारण इन को पकड़ने पुलिस के लिए सिरदर्द बन जाता है।यहाँ यह कहना भी ज़रूरी है कि ट्रैक्टर ट्राले को कमर्शियल तौर पर प्रयोग में लाने और माननीय सुप्रीम कोर्ट की तरफ से रोक लगी हुई है परन्तु फिर भी इन का प्रयोग शरेआंम कमर्शियल तौर पर की जा रही और कानून को छींके टाँग कर कई गुणों अधिक उवरलोड पहनने कारण जहाँ सड़कों के टूटने का कारण बनते हैं वहां ही आए दिन कोई न कोई हादसा भी हनके कारण घटता रहता हे क्योंकि उवरलोड होने के कारण ट्रैक्टर के अगले टायर रोड पर नहीं लगते और हतना की कटाई सिर्फ़ पिछले टायरों और ब्रेकों का प्रयोग की जाती है।भीड़ पहाड़ वाली सड़कें पर भी यह इसी तरह गुज़रते हैं परन्तु किसी का भी ध्यान इन की तरफ नहीं जाता।
क्या कहते हैं ज़िला ट्रांसपोर्ट अफ़सर? इस मामले बारे जब ज़िला ट्रांसपोर्ट अधिकारी श्री विजय कुमार स्याल के साथ बात की गई तो उहोने कहा कि इन विरुद्ध ज़िला ट्रांसपोर्ट विभाग की तरफ से मुहिम शुरु की हुई है और जहाँ भी यह हमें रोड और चलते मिलते हैं इन को बंद कर दिया जाता है और उन की तरफ से ज्यादतर चालान इन ट्रालियाँ के ही काटे जाते हैं। उनहोने कहा कि इन ट्रैक्टर ट्रालियाँ को पकड़ना हमारे लिए भी बहुत बड़ी समस्या बना हुआ है क्योंकि इन के आगे और पीछे कुछ लोग दो पहिया वाहन और चलते हैं जो इन को ट्रैफ़िक नाकों और हमारे से सुचेत करते हैं परन्तु फिर भी हमने इनके ख़िलाफ़ सख्ती इस्तेमाल की हुई है और किसी को भी कानून की उलंघणें नहीं करने दी जायेगी।
चाहे ज़िला ट्रांसपोर्ट अधिकारी की तरफ से इन ख़िलाफ़ कार्यवाही करने की बात की ह गई परन्तु हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं है यदि ज़िला ट्रैफ़िक और ज़िला ट्रांसपोर्ट विभाग सख्ती इस्तेमाल कर रहा हो तो ऐसे उवरलोड ट्रैक्टर ट्राले कभी भी रोड पर दिखाई ना दे अब देखना यह होगा कि सरकार की तरफ से इस की तरफ क्या कदम उठाये जाते हैं और इनके ख़िलाफ़ और अणगेहली बरताव वाले अफ़सर ख़िलाफ़ कार्यवाही कब अमल में लाई जाती है।

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