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महन्त जगन्नाथ पुरी, व्यवस्थापक, मार्कण्डेश्वर महादेव मन्दिर

धर्मनगरी कुरुक्षेत्र को तीर्थों की संगम स्थली कहा जाता है , यहाँ आज कल ऐसा लगता है पूरी धर्मनगरी सावन में भोलेनाथ के रंग में रंगी है , हर तरफ बम भोले की गूंज हो रही है, सावन मास के पहले सोमवार को शिव मन्दिरों का नजारा ही अलग है, चाहे पवित्र सन्निहित सरोवर पर दुःख भंजन महादेव मन्दिर हो , श्री मार्कण्डेश्वर महादेव ठसका मीरां जी, स्थानीश्वर महादेव मंदिर इत्यादि सभी मंदिरों में शिव भक्तों की भीड़ लगी है, अभी सावन महीने का प्रथम सप्ताह ही प्रारम्भ हुआ है और आज सावन का पहला सोमवार है, शिव मन्दिरों में सूर्य उदय से पूर्व ही भोलेनाथ को मनाने के लिए शिव भक्तों का ताँता लगना शुरू हो जाता है,श्रावण मासके उपलक्ष्य में दुःख भंजन महादेव मन्दिर, मार्कण्डेश्वर महादेव मंदिर ठसका मीराँ जी, स्थानीश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की पूजा अर्चना की, मास के पहले सोमवार के दिन हजारों श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया,
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इस मौके पर महन्त जगन्नाथ पुरी ने कहा कि श्रावण भगवान शिव का प्रिय मास है, इस माह में विधिवत रूप से पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, उन्होंने कहा कि पुराणों और शास्त्रों के अनुसार सोमवार के व्रत तीन तरह के होते हैं,
श्रावण सोमवार, सोलह सोमवार और सोम प्रदोष, इनमें से सोमवार व्रत की विधि सभी व्रतों में समान होती है, इस व्रत को श्रावण माह में शुरू करना शुभ माना जाता है,
श्रावण सोमवार के व्रत में भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है, श्रावण सोमवार व्रत सूर्योदय से शुरू कर तीसरे पहर तक किया जाता है, शिव पूजा के बाद सोमवार व्रत की कथा सुननी चाहिए,

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