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निर्देशों की धज्जियाँ उड़ा रही मोबाइल टावर कम्पनीयां

फरीदकोट(शरणजीत कौर) केंद्र सरकार की तरफ से भीड़भाड़ वाले खेतरों में मोबाइल टावरों को लगाने सम्बन्धित जारी निर्देशों को इलाके की ज़्यादातर टावर कंपनियों की तरफ से खरा नहीं उतरा जा रहा, जिस कारण भीड़ भड़के वाले स्थानों पर मोबायल टावरों की संख्या घटने की जगां लगातार बढ़ती जा रही है। बताने योग्य है कि शहर में लगाए जा रहे मोबायल टावरों के साथ सम्बन्धित कंपनियों की तरफ से जारी उक्त निर्देशों की पूरी तरह नज़र अन्दाजी की जा रही है, जिस के चलते स्कूलों, भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मोबायल टावर लगाए जा रहे हैं। जबकि दिशा निर्देशों अनुसार अधिक आबादी वाले क्षेत्रों के इलावा स्कूल और हस्पताल के नज़दीक टावर नहीं लगाए जाने चाहिए, परन्तु इस सम्बन्धित जिला प्रशाशन की तरफ से दी जा रही ढील का टावर कंपनियाँ धड़ल्ले के साथ फ़ायदा उठा रही हैं, जिस का अंदाज़ा सहर के निजी स्कूलों और महल्ले में भी बढ़ रही टावरों की संख्या से भलीभांत लगाया जा सकता है। उक्त निर्देशों की ,की जा रही अणदेखी के चलते तलवंडी चौक नज़दीक, कंमेआना गेट, डोगर बस्ती, बस स्टैंड नज़दीक,बाबा फ़रीद मार्केट, के इलावा रेलवे फाटक के नज़दीक निजी हस्पताल के पास लगे टावर पर एक से अधिक एन्टिना लगा दिए गए हैं इस सम्बन्धित माहिर डाक्टरों का कहना है कि मोबायल टावरों के रेडीएशन से कई तरह की भयानक बीमारियाँ के हौंद में आने की पूर्ण संभावना है। उनके अनुसार मोबायल टावरों में निकलने वाली यह तरंगें फेफड़ों के कमज़ोर होने, नींद न आना, तनाव, सिर दर्द, बेचैनी, आँखों की रौशनी कम होने के साथ साथ कैंसर जैसी ख़तरनाक बीमारियों का संयोग बन सकतीं हैं। इस मामले का अहम पहलू यह भी है कि हालाँकि टावर लगाने वाले लोग भी मानते हैं कि टावर से निकलने वाली किरणें सेहत पर बुरा प्रभाव डालती हैं परन्तु प्रति महीने मिलने वाले 6 से 8 हज़ार रुपए की आमदनी के चलते वह टावर अपनी, इमारतों में लगवाने में रूचि भी ले रहे हैं।

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